अफवाह | hindi kahani | Afwaah | panchtantra ki kahani

पंचतंत्र:अफवाह | hindi kahani | Afwaah | panchtantra ki kahani


एक बहुत ही सुंदर और बड़ा जंगल था। तरह-तरह के पैड पौधे, फल फूल वाले जंगल में चारों तरफ शांति रहती थी। सभी छोटे, बड़े पक्षि और प्राणी मिल झूल के रहते थे। 

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जंगल में एक छोटा-सा तालाब था। इस तालाब के किनारे पर एक मेंढक रहता था जिसका नाम था ढेंचू। ढेंचू स्वभाव से बहुत ही सीधा-साधा था, लेकिन वह डरपोक भी था। उसके मन में हमेशा कुछ न कुछ अनहोनी होने का डर बना रहता था। वह अक्सर छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज़्यादा सोचता था।

एक दिन की बात है, ढेंचू तालाब के किनारे बैठा था। तभी, एक भारी-भरकम भालू तालाब में पानी पीने आया। भालू के पैर कीचड़ में धँस गए । भालू ने थोड़ा जोर लगा कर खुद का पैर निकाल ने की कोशिश की। पैर निकलते ही "फच्च!" की तेज़ आवाज़ आई। ढेंचू ने यह आवाज़ सुनी और उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने सोचा, "यह कैसी आवाज़ थी? लगता है जंगल में कोई नया और ख़तरनाक जानवर आ गया है।"

ढेंचू डर गया और उसने अपनी बात दूसरे मेंढकों को बताई। उसने कहा, "भाइयों, मैंने एक बहुत ही भयानक जानवर की आहट सुनी है! उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि मेरे कान बजने लगे।"
दूसरे मेंढकों ने ढेंचू की बात पर विश्वास कर लिया और वे भी डर गए। उनमें से एक ने कहा, "मैंने तो सुना है कि वह जानवर पहाड़ जितना बड़ा है और उसके दाँत तलवार की तरह नुकीले हैं।"

यह बात जंगल में आग की तरह फैलने लगी। जिस किसी ने भी यह बात सुनी, उसने अपनी तरफ से कुछ न कुछ जोड़ दिया। एक हिरन ने कहा, "मैंने तो सुना है कि वह जानवर एक ही झटके में बड़े-से-बड़े पेड़ को भी गिरा देता है।"

एक हाथी ने सुना कि वह जानवर हवा से भी तेज़ दौड़ता है। एक शेर ने सुना कि वह जानवर शेर को भी मात दे सकता है।

देखते ही देखते, "फच्च!" की मामूली आवाज़ एक ऐसे काल्पनिक राक्षस में बदल गई जो पूरे जंगल को तबाह कर सकता था। हर कोई डर गया। जंगल के सभी जानवर अपने-अपने बिलों और घोंसलों में छिप गए। पूरा जंगल ख़ामोश हो गया।

इस अफ़वाह के कारण, जानवर शिकार करने से डरने लगे। कोई बाहर नहीं निकलता था। भूखे रहने से कई जानवर कमज़ोर होने लगे।

यह सब देखकर, एक बूढ़ा उल्लू जो एक ऊँचे पेड़ पर बैठा था, बहुत चिंतित हुआ। उसने सोचा, "यह कैसी मूर्खता है? बिना किसी बात के सभी जानवर इतने डरे हुए क्यों हैं?"

उल्लू ने एक लोमड़ी को बुलाया, जो बहुत ही समझदार थी। उसने लोमड़ी को सारी बात बताई और कहा, "तुम्हें इस अफ़वाह की सच्चाई का पता लगाना होगा। सभी जानवर डरे हुए हैं और इसका नतीजा बहुत बुरा हो सकता है।"

लोमड़ी ने हाँ कहा और तुरंत जांच में लग गई। वह एक-एक जानवर से मिली और सबने अपनी सुनी-सुनाई बातें उसे बताईं। आख़िर में, वह मेंढक ढेंचू के पास पहुँची।

लोमड़ी ने ढेंचू से पूछा, "क्या तुमने सचमुच उस भयानक जानवर को देखा है?"
ढेंचू ने ईमानदारी से कहा, "नहीं, मैंने उसे देखा तो नहीं, बस उसकी आवाज़ सुनी थी।"
लोमड़ी ने पूछा, "उसकी आवाज़ कैसी थी?"
ढेंचू ने बताया, "वह 'फच्च!' की आवाज़ थी।"
यह सुनकर लोमड़ी को हंसी आ गई। वह समझ गई कि यह सिर्फ़ एक अफ़वाह थी। वह तुरंत जंगल के सभी जानवरों को इकट्ठा करने गई।

जब सभी जानवर एक जगह इकट्ठा हुए, तो लोमड़ी ने ज़ोर से कहा, "भाइयों और बहनों! हमें डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। जिस भयानक जानवर से हम सब डर रहे हैं, वह कहीं नहीं है। वह सिर्फ़ एक अफ़वाह है।"

सभी जानवर चौंक गए।
लोमड़ी ने आगे कहा, "वह 'फच्च!' की आवाज़ किसी जानवर की नहीं, बल्कि उस भालू के पैर कीचड़ में धँसने और निकलने की थी।"

यह सुनकर सभी जानवर हैरान रह गए। उन्हें अपनी मूर्खता पर हंसी आई। एक साधारण-सी आवाज़ ने कैसे पूरे जंगल को डरा दिया था।

इस घटना के बाद, सभी जानवरों ने महसूस किया कि सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। वे समझ गए कि अफ़वाहें कितनी ख़तरनाक हो सकती हैं।

इस कहानी से मिलने वाली सीख:

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि बिना सोचे-समझे और बिना सच्चाई जाने किसी भी बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए। अफ़वाहें अक्सर सच से बहुत दूर होती हैं और बिना किसी आधार के डर और भ्रम पैदा करती हैं। 

इसलिए, किसी भी बात को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करना बहुत ज़रूरी है। अन्यथा, हम भी उस मेंढक और जंगल के जानवरों की तरह बिना वजह परेशान हो सकते हैं।

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