जादुई चप्पल
एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में मोनू नाम का एक लड़का रहता था। वो काफी शरारती था। उसकी शरारतें पूरे गाँव में मशहूर थीं। कभी वह किसी की साइकिल, ट्रैक्टर या कोई भी वाहन दिखाई दे तो उसके टायरों की हवा निकाल देता, तो कभी किसी के खेत में जाकर पानी की पाइप मोड़ देता।
बेचारे सभी गांव वाले उसकी हरकतों से तंग आ चुके थे। मोनू अपने माँ - बाप की थी नहीं सुनता था।
एक दिन मोनू सुबह अपने घर के पीछे लगे पेड़ पर चढ़कर पके हुवे आम तोड़ रहा था कि अचानक उसकी नज़र एक पुरानी, फटी हुई चप्पल पर पड़ी। दिखने मे काफी स्टाइलिश थी। वह चप्पल इतनी पुरानी थी कि शायद किसी ने उसे बहुत पहले छोड़ दिया होगा।
मोनू ने सोचा, “मेरे पास भी चप्पल नहीं है ,किसी दूसरे के घर पर यह चप्पल रख कर मेरे लायक चप्पल उठा लूंगा।”
जैसे ही मोनू ने चप्पल को उठाया और उसे पहनने की कोशिश की तब एक अजीब सा चमत्कार हुआ। चप्पल अचानक चमकने लगी और मोनू को एक पल के लिए ऐसा लगा मानो कोई उससे बात कर रहा हो। चप्पल मे से एक डरावनी आवाज आई, “मोनू, मैं एक जादुई चप्पल हूँ। अगर तुम मेरी मदद करोगे, तो मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी कर सकती हूँ।”
मोनू यह सुनकर डर गया गया । फिर दिखावा करते हुए मुस्कराते हुए कहा,“जादुई चप्पल? वाह! ऐसी भी कोई चप्पल रहती है क्या ? मुझसे तो पूरा गांव परेशान हैं। आखिर मुझसे ऐसी कौन सी मदद चाहिए तुझे? चल, फटाफट बता।"
चप्पल ने कहा, “मुझे मेरी मालकिन के पास वापस जाना है। वह बहुत दूर रहती है। लेकिन मैं बिना किसी की मदद के वहाँ नहीं जा सकती।”
मोनू ने सोचा, “ अरे वाह, यह तो बड़ी अच्छी बात है! अगर मैं इस चप्पल की मदद करूँगा, तो मेरी सारी इच्छाएँ पूरी हो जाएँगी।”
मोनू हर तरह के सपने देखने लगा।
उसने चप्पल को पहन लिया और पूछा, “ठीक है। अब बता, करना क्या है?”
जादुई चप्पल ने कहा, “जब भी तुम किसी की मदद करोगे, तो मैं तुम्हें एक जादुई शक्ति दूँगी।”
राजू ने सोचा, “ठीक है, कोई बात नहीं।”
मोनू अब जादुई चप्पल को पहनकर गाँव में घूम रहा था। तभी रास्ते में उसे एक बूढ़ी अम्मा मिली जो अपनी भारी गठरी को उठाकर परेशान थीं। गठरी इतनी ज्यादा वजनदार थी कि वह उसे उठा नहीं पा रही थी। मोनू यह देखकर हंस रहा था। मोनू को अम्माँ के साथ शरारत सूझी, “अरे! चलो, इस अम्मा को तंग करते हैं।”
लेकिन तभी चप्पल चमकने लगी और एक धीमी आवाज़ में बोली, “मोनू, अगर तुम इस अम्मा की मदद करोगे, तो मैं तुम्हें एक शक्ति दूँगी।”
मोनू को अपनी शरारत भूल गई और उसने अम्मा की मदद करने का फैसला किया। उसने अम्मा की गठरी उठाई और उनके घर तक पहुँचा दी। अम्मा ने मोनू को बहुत-बहुत आशीर्वाद दिया।
जैसे ही मोनू ने यह नेक काम किया, उसकी चप्पल चमकने लगी और उसे एक शक्ति मिली। अब वह घोड़े की रफ्तार जैसी तेज़ी से दौड़ सकता था कि कोई भी उसे पकड़ नहीं सकता था। मोनू इस शक्ति से बहुत खुश हुआ।
एक दिन, गाँव में एक बड़ा तूफान आया। सभी लोग डर के मारे तूफान से बचने के लिए अपने घरों में दुबक गए। लेकिन एक घर के बाहर एक छोटे बच्चे की आवाज सुनाई दी। बच्चा जोर जोर से रो रहा था। मोनू आवाज की दिशा में भागा। मोनू ने देखा कि वह बच्चा पेड़ के नीचे बैठा था और वह पेड़ पुराना था जो किसी भी वक्त गिर सकता था।
मोनू को पता था कि अगर वह उस बच्चे को नहीं बचाएगा, तो बहुत बुरा होगा। चप्पल ने भी उसे मदद करने के लिए कहा। मोनू अपनी तेज़ी से दौड़ने की शक्ति का उपयोग करके हवा को चीरते हुए बच्चे के पास पहुँचा और उसे उठाकर सुरक्षित जगह पर ले आया। मोनू का यहा काम से खुश होकर जादुई चप्पल एक और बार चमकी । मोनू को एक और नई शक्ति मिली। अब वह हवा में उड़ सकता था।
मोनू अब इन शक्तियों का उपयोग सिर्फ अच्छे कामों के लिए करने लगा। वह हर दिन गाँव वालों की मदद के लिए आगे रहता, ज़रूरतमंदों को खाना लाकर देता और हर किसी की परेशानी दूर करता। सभी गाँव वाले जो पहले उससे तंग थे, अब उसे प्यार करने लगे थे।
एक दिन, जादुई चप्पल बहुत ज़ोर से चमकी और एक आवाज़ आई, “मोनू, तुमने मेरी मालकिन को ढूँढने में मेरी मदद की है। अब मुझे वापस जाना होगा।”
मोनू ने पूछा, “आपकी मालकिन कौन है?”
चप्पल ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारी दादी।”
मोनू को यह सुनकर बहुत हैरानी हुई। उसकी दादी बहुत पहले गाँव छोड़कर चली गई थीं। तभी मोनू को पता चला कि यह चप्पल तो उसकी दादी की थी और वह उसे यह सिखाने आई थी कि, जीवन में कभी भी किसी का भूरा नहीं करना चाहिए। अच्छाई की शक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति होती है।
मोनू ने अपनी दादी की चप्पल को एक छोटे से बक्से में रख दिया और गाँव के सभी लोगों की मदद करना जारी रखा।
अब वह एक शरारती लड़का नहीं, बल्कि गाँव का हीरो बन चुका था। और वह हर दिन जादुई चप्पल को याद करता और उस से मिली सीख को कभी नहीं भूलता।
कहानी की सीख
अच्छाई की ताकत सबसे बड़ी होती है।
मदद करने से हमें असली खुशी मिलती है।
बुराई से अच्छाई की ओर बढ़ना ही सच्ची जीत है।
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