बच्चों के लिए प्रेरणादायक कहानी | चालाक तोता और आलसी बंदर | hindi stories | kahaniyan


चालाक तोता और आलसी बंदर


कहानी का परिचय


जंगल की दुनिया कितनी रंगीन और मजेदार होती है। वहाँ हर पेड़, हर पत्ता, हर जानवर की अपनी कहानी होती है। इसी जंगल में एक चालाक तोता और एक आलसी बंदर रहते थे। दोनों की सोच और आदतें एकदम अलग थीं। जहाँ तोता मेहनती और चतुर था, वहीं बंदर खाने-पीने में दिलचस्पी रखने वाला और कामचोर था।


आज की कहानी इसी तोते और बंदर की है, जो हमें सिखाती है कि आलस्य छोड़कर मेहनत करना ही असली सुख देता है।

चालाक तोते और आलसी बंदर की कहानी का चित्र


कहानी की शुरुआत


एक घना जंगल था। पेड़ इतने ऊँचे थे कि उनकी टहनियाँ आसमान को छूती थीं। वहाँ के बीचों-बीच एक पुराना और बड़ा पेड़ था, जिसके ऊपर रहता था तोता चिरकुट। चिरकुट अपनी मेहनत और चालाकी के लिए पूरे जंगल में मशहूर था।


दूसरी तरफ, उसी पेड़ के नीचे रहता था बंदर गप्पू। गप्पू का काम सिर्फ दिनभर सोना, इधर-उधर घूमना और दूसरों के लाए हुए फलों पर जीना था।


संवाद शुरू होता है


एक दिन चिरकुट ने पेड़ के ऊपर से पके हुए आम तोड़े और चाव से खाने लगा।

नीचे से गप्पू ने आवाज लगाई,


“अरे चिरकुट भाई! कुछ फल इधर भी गिरा दे। मैं ऊपर चढ़ नहीं सकता।”


तोता बोला, “गप्पू, खुद मेहनत कर। मेहनत से मिला फल ही सबसे मीठा लगता है।”


गप्पू ने मुँह बनाते हुए कहा,

“मेहनत? वो तो मेरे बस की बात नहीं। तू ही दे दे, दोस्ती में क्या जाता है?”


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तोते की चालाकी


तोते ने सोचा, “ये बंदर तो हर दिन यही करेगा। अगर इसे सबक न सिखाया, तो ये कभी मेहनत करना नहीं सीखेगा।”


तोते ने कुछ कच्चे, खट्टे फल नीचे गिरा दिए। गप्पू ने बिना सोचे समझे मुँह में डाले और तुरंत थूक दिया।


“छी…! ये तो खट्टे हैं!” गप्पू चिल्लाया।


तोता हँसते हुए बोला,

“क्यों भाई? मेहनत से नहीं कमाया तो ऐसा ही होगा।”


कहानी का मोड़


अगले दिन गप्पू भूखा था। उसने सोचा, “अगर मैं ऊपर चढ़ूँगा तो बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। लेकिन अगर चिरकुट को बहला-फुसलाकर फल ले लूँ तो?”


वह बोला,

“चिरकुट भाई, आज मैं मदद करूँगा। तुम मुझे सिखाओ कैसे फल तोड़ते हो।”


तोते ने सोचा, “लगता है इसे समझ आ रही है।”


उसने गप्पू को छोटे पेड़ों पर चढ़ना सिखाया। गप्पू ने पहली बार पके आम खुद तोड़े।


गप्पू का बदलना


धीरे-धीरे गप्पू को मेहनत की आदत लगने लगी। अब वह खुद पेड़ों पर चढ़कर फल तोड़ता और मजे से खाता।


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एक दिन उसने तोते से कहा,

“तुम्हारा धन्यवाद चिरकुट। अगर तुम मुझे सबक न सिखाते तो मैं कभी मेहनत की कीमत नहीं समझ पाता।”


तोता मुस्कुराया और बोला,

“मेहनत से मिला फल ही जिंदगी में मिठास लाता है, गप्पू। याद रखना, जो खुद मेहनत करता है वही असली मजा लेता है।”


कहानी से शिक्षा


आलस्य इंसान की प्रगति रोकता है।


मेहनत से मिला फल ही सबसे मीठा होता है।


दूसरों पर निर्भर रहना हमें कमजोर बनाता है।



FAQs 


Q1. चालाक तोता और आलसी बंदर की कहानी हमें क्या सिखाती है?

यह कहानी सिखाती है कि आलस्य छोड़कर मेहनत करने से ही असली खुशी और सफलता मिलती है।


Q2. यह कहानी बच्चों के लिए क्यों अच्छी है?

क्योंकि यह मजेदार ढंग से मेहनत और आत्मनिर्भरता का महत्व बताती है।


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